शेयर मार्केट में ट्रेडर को अपनी आवश्यकता और जीबन शैली के अनुसार ट्रेडिंग स्टाइल का चुनाव करना चाहिए। इसलिए आज हम Trading Meaning in Hindi लेख में जानेंगे कि ट्रेडिंग कितने प्रकार के होते हैं?

एक ट्रेडर की जोखिम उठाने की क्षमता और जोखिम सहन करने की क्षमता के अनुसार विभिन्न प्रकार की ट्रेडिंग शैलियाँ है जैसे- स्केलिंग ट्रेडिंग, स्प्रेड ट्रेडिंग, इंट्राडे ट्रेडिंग, आर्बिट्रेज ट्रेडिंग आदि हैं।

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग शैली चुनने का सबसे अच्छा तरीका जोखिम लेने की क्षमता और विशेषज्ञता के अनुसार है। तो आइए Trading Meaning in Hindi लेख के माध्यम से समझते हैं कि विभिन्न ट्रेडिंग शैलियाँ क्या हैं और कौन सी ट्रेडिंग शैली आपके लिए सही है?

 

एक ट्रेडर कौन होता है? 

स्टॉक मार्केट में बहुत से लोग जल्दी पैसा कमाने के उद्देश्य से आते है जिसमे कुछ लोग निवेश करते है और कुछ लोग ट्रेडिंग की शुरुआत करते है। 

एक ट्रेडर वह होता है जो शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग कर जल्दी पैसा कमाने के उद्देश्य से ट्रेडिंग करता है। एक ट्रेडर ज्यादा जोखिम लेकर ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करता है जबकि निवेश में कम जोखिम के साथ कम रिटर्न होता है। 

अभी हम Trading Meaning in Hindi समझ गए है अभी हम समझते है कि ट्रेडिंग कितने प्रकार के होते हैं?

 

ट्रेडिंग कितने प्रकार के होते हैं?

कुछ ट्रेडर्स शॉर्टटर्म में शेयर खरीदते और बेचते हैं, जबकि कुछ ट्रेडर आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बेचने के लिए शेयरों को लंबे समय तक होल्ड रखते हैं। हर ट्रेडर की अपनी रणनीति और ट्रेडिंग शैली होती है।

तो आइए समझते है ट्रेडिंग कितने प्रकार के होते हैं:

 

#1 स्केल्पिंग ट्रेडिंग

स्केल्पिंग ट्रेडिंग में ट्रेडर अपनी पोजीशन को कुछ सेकंड या मिनटों के लिए होल्ड रखते हैं। इससे ट्रेडर को छोटे-छोटे मूवमेंट का लाभ मिलता है। इसके साथ ही इसमें ट्रेडर से तेज ट्रेड एक्सेक्यूशन की मांग की जाती है। 

इसमें बाजार बंद होने से पहले ट्रेडर बहुत से ट्रेड भी कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए,

एक शेयर की वर्तमान कीमत 100 रुपये है और ट्रेडर ने 500 शेयर खरीदे है अव अगर शेयर की प्राइस 102 पर चली जाती है तो ट्रेडर को 1,000 रुपये का लाभ मिलेगा। इसे स्कैल्पिंग ट्रेडिंग के नाम से जाना जाता है।

 

#2 इंट्राडे ट्रेडिंग

इंट्राडे ट्रेडिंग को डे ट्रेडिंग के रूप में भी जाना जाता है। यह एक बहुत ही प्रसिद्ध ट्रेडिंग शैली के रूप में जानी जाती है और आपने इसके बारे में जरूर सुना होगा। इंट्राडे ट्रेडिंग का मतलब है कि आप शेयर खरीदते हैं और शेयर खरीदने के कुछ घंटों के भीतर ही उन्हें बेच देते हैं यानि कि मार्केट बंद होने से पहले आपको अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ़ करना होता है। 

सरल शब्दों में, इंट्राडे ट्रेडिंग एक ट्रेडिंग शैली है जिसमें ट्रेडर अपनी पोजीशन को कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक होल्ड रखता है और बाजार बंद होने से पहले अपनी पोजीशन से बाहर निकल जाता है, जिसे इंट्राडे ट्रेडिंग कहा जाता है।

उदाहरण के लिए,

एक शेयर की वर्तमान कीमत 100 है, जिसे आपने इंट्राडे में खरीदा है। अव इसमें आपको बाजार के बंद होने से पहले आपको लाभ या हानि हो सकती है।

कई बार ऐसा होता है कि आपने 100 रूपये में शेयर खरीदा है और शेयर की प्राइस कुछ समय बाद 90 ही रह जाती है इस स्थिति में इंट्राडे ट्रेडर को नुकसान होगा। 

ऐसा भी हो सकता है कि मार्केट बंद होने से पहले शेयर का प्राईस 110 हो जाए तो इस स्थिति में आपको लाभ होगा। 

इसलिए इंट्राडे ट्रेडिंग में आपको बेहद सावधान रहने की जरूरत होती है। 

 

#3 स्विंग ट्रेडिंग

एक ऐसा ट्रेडर जो अपनी पोजीशन को कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह तक होल्ड रखता है उसे स्विंग ट्रेडिंग के रूप में जाना जाता है।

स्विंग ट्रेडिंग में ट्रेडर शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करके बाजार से अच्छा मुनाफा कमाता है, जिसमें वह ऐसे स्टॉक की तलाश करता है, जो उसे कम समय में अच्छा रिटर्न दे सके।

उदाहरण के लिए,

अगर शेयर की वर्तमान कीमत 100 रुपये है और शेयर ने अभी अभी ब्रेकआउट दिया है तो यह उम्मीद की जा सकती है कि आने बाले कुछ दिनों या सप्ताह में अच्छा रिटर्न दे सकता है। 

 

#4 पोजीशनल ट्रेडिंग

पोजिशनल ट्रेडिंग वह ट्रेडिंग है जिसमें ट्रेडर  को कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक होल्ड रखता है लेकिन यह पोजीशन 1 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसे पोजिशनल ट्रेडिंग के रूप में जाना जाता है।

पोजिशनल ट्रेडिंग में, आप स्टॉक प्राइस में एक लंबे मूवमेंट का लाभ उठाकर लाभ कमा सकते हैं।

उदाहरण के लिए,

एक शेयर की वर्तमान प्राइस 100 रुपये है और आपने कंपनी का फंडामेंटल और तकनीकी विश्लेषण अच्छे से किया है। आपने यह भी विश्लेषण किया कि अगले 3 से 4 महीनों में शेयर की कीमत 140 तक जा सकती है। 

आप शेयरों को 100 के रूप में खरीदेंगे। 3 से 4 महीने के बाद, आप शेयर बेच देंगे क्योंकि आपको लगता है कि आने बाले तीन – चार महीनो में शेयर की प्राइस 140 तक जा सकती है। 

 

#5 BTST ट्रेडिंग – आज खरीदें, कल बेचें

BTST ट्रेडिंग का मतलब है कि आज आपने जो शेयर खरीदा है वह कल बेचा जाएगा। ऐसा हम तब करते हैं जब हमें लगता है कि कल इस स्टॉक में अच्छी मूवमेंट होने बाली है या कल इस स्टॉक में गैप-अप ओपनिंग होने वाली है, इस उम्मीद के साथ BTST ट्रेड लेते है।  

उदाहरण के लिए,

मान लीजिए आज हम स्टेट बैंक का शेयर ₹500 प्रति शेयर के भाव से खरीदते हैं और कल इसका तिमाही रिजल्ट आने वाला है तो हमें लगता है कि इसके परिणाम अच्छे रहने वाले हैं। इसी उम्मीद के साथ हमने इसे खरीदा है, इसलिए कल अगर स्टेट बैंक के शेयर में गैप-अप ओपनिंग होती है और स्टेट बैंक का शेयर ₹500 से 510 तक पहुंच जाता है, तो हमें अच्छा मुनाफा होगा।

 

#6 मोमेंटम ट्रेडिंग

मोमेंटम ट्रेडिंग का मतलब है कि किसी शेयर की प्राइस एक रेंज में चल रही थी और अचानक शेयर की प्राइस उस रेंज से बाहर निकल जाती है। इसलिए इसे ब्रेकआउट कहा जाता है और उम्मीद की जाती है कि यह मोमेंटम ऊपर की ओर इसी तरह बनी रहेगी। तो इस प्रकार की स्थिति को मोमेंटम ट्रेडिंग कहा जाता है।

सरल शब्दों में, किसी भी स्टॉक के मूवमेंट को पकड़ने और लाभ कमाने की विधि को मोमेंटम ट्रेडिंग कहा जाता है।

ब्रेकआउट निम्न प्रकार के हो सकते हैं:

  • प्राइस ब्रेकआउट
  • वॉल्यूम ब्रेकआउट
  • चार्ट पैटर्न ब्रेकआउट

उदाहरण के लिए,

अगर शेयर पिछले 3 दिनों से 100 से 102 के बीच के रेंज में ट्रेड कर रहा है। अगले दिन शेयर का प्राइस बढ़कर 103 हो गया।

इस प्राइस पॉइंट पर, यह माना जाता है कि शेयर ने अपना ब्रेकआउट दिया है क्योंकि शेयर उस रेंज से बाहर निकल आया है।

 

#7 पुलबैक ट्रेडिंग

पुलबैक ट्रेडिंग का अर्थ है रिवर्सल। मान लीजिए कोई शेयर लगातार गिर रहा है तो वह कही न कही तो रुकेगा ही, फिर वह नीचे के एक सपोर्ट पर रुक जाता है और वहीं से ऊपर की ओर मूवमेंट दिखाने लगता है। तो जिस प्राइस पॉइंट से वह रिवर्स कर गया उसे पुलबैक कहा जाता है और जो ट्रेडर इस पुलबैक को ट्रेड करता है उसे पुलबैक ट्रेडर कहा जाता है।

उदाहरण के लिए,

मान लीजिए स्टेट बैंक का स्टॉक लगातार गिर रहा है और यह 450 के भाव पर सपोर्ट लेता है और उसी से ऊपर की ओर पलट जाता है। यदि आप 450 की कीमत पर प्रवेश करते हैं, तो आप बहुत अच्छा लाभ कमाएंगे क्योंकि वहां से ऊपर की ओर पुलबैक होता है।

 

#8 एल्गो ट्रेडिंग

आजकल, यह ट्रेडिंग के लोकप्रिय शैली में से एक है। आपने ब्रोकरों से सुना होगा कि वे एल्गो ट्रेडिंग करते हैं और कुछ ब्रोकर केवल एल्गो ट्रेडिंग में ही डील करते हैं। एल्गो ट्रेडिंग में, कंप्यूटर एक प्रोग्राम से जुड़ा होता है जिसे कंप्यूटर आपके निर्देश के अनुसार ट्रेड करेगा।

एल्गो ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर आपके द्वारा दर्ज किए गए इंस्ट्रक्शन के आधार पर खुद ही खरीदने या बेचने का फैसला करता है। 

 

निष्कर्ष

स्टॉक ट्रेडिंग के दौरान जोखिम के स्तर का विश्लेषण करें जिसे आप सहन कर सकते हैं। वह ट्रेडिंग शैली चुनें जो आपकी जोखिम उठाने की क्षमता और आवश्यकताओं को पूरा करे और स्टॉक ट्रेडिंग शुरू करने से पहले स्टॉक मार्केट और ट्रेडिंग के बारे में अच्छे से समझ ले। 

मुझे आशा है कि आप सभी विभिन्न प्रकार की ट्रेडिंग शैलियाँ समझ गए होंगे। तो अगर Trading Meaning in Hindi लेख के संबंध में कोई प्रश्न है। आप इस पोस्ट के नीचे कमेंट कर सकते हैं।

मैं आपको आपके ट्रेडिंग करियर में शुभकामनाएं देता हूं…।