स्विंग ट्रेडिंग भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में लोकप्रिय है इसलिए आज हम Swing Trading Meaning in Hindi लेख में समझेंगे कि स्विंग ट्रेडिंग क्या है और स्विंग ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

स्विंग ट्रेडर जब किसी स्टॉक में एक अच्छे ट्रेंड को बनते हुए देखते हैं, तो वह ट्रेड करना शुरू कर देते हैं और जब तक ट्रेड में बने रहते है जब तक कि वह ट्रेंड ख़त्म न हो जाए। 

स्विंग ट्रेडिंग मूल रूप से तेजी से पैसा बनाने के लिए बढ़ते स्टॉक या अन्य प्रकार के निवेश की तलाश के वारे में हैं। ये सुनने में मजेदार लगता है, लेकिन सवाल यह आता है कि क्या स्विंग ट्रेडिंग वास्तव में एक प्रॉफिट वाली निवेश रणनीति है? आइए Swing Trading Meaning in Hindi लेख में इस पर गहराई से विचार करते है। 

 

स्विंग ट्रेडिंग क्या है?

स्विंग ट्रेडिंग एक प्रकार की ट्रेडिंग शैली है जहां ट्रेडर किसी भी स्टॉक में अपनी पोजीशन ले कर उसको कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह तक होल्ड रखता है। स्विंग ट्रेडिंग का लक्ष्य उस समय सीमा के दौरान स्टॉक की कीमत में बदलाव से लाभ कमाना है। 

सबसे अच्छाएंट्री और एग्जिट पॉइंट चुनने के लिए अधिकांश स्विंग ट्रेडर डेली चार्ट, 60 मिनट, 24 घंटे, 48 घंटे, आदि का उपयोग करते हैं। हालांकि, आप कम समय सीमा चार्ट का उपयोग भी कर सकते हैं, जैसे कि 4-घंटे या 1  घंटा चार्ट।

स्विंग ट्रेडर किसी भी स्टॉक में पोजीशन लेने से पहले उस स्टॉक का टेक्निकल एनालिसिस करता है और ये पता लगाने की कोशिश करता है कि किस स्टॉक में ट्रेंड की शुरुआत हो रही है जिससे कि वह शुरुआती ट्रेंड में ट्रेड ले और जब तक बना रहे जब तक की उस स्टॉक में ट्रेंड बदल न जाए, जिससे कि वह अच्छा प्रॉफिट कर सके। 

स्टॉक मार्केट में अवसरों का लाभ उठाने के लिए, एक स्विंग ट्रेडर को अल्पावधि में लाभ कमाने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए शीघ्रता और बुध्दिमानी से कार्य करना चाहिए।

 

स्विंग ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

सबसे पहले, स्विंग ट्रेडिंग करते समय एक ट्रेडर को आमतौर पर मार्केट ट्रेंड और पैटर्नों को देखना होता है ताकि स्विंग ट्रेडर्स को डाउन ट्रेंड या अपट्रेंड वाले स्टॉक खोजने में मदद मिल सके। 

स्विंग ट्रेडिंग में अगर ट्रेडर को लगता है कि कोई स्टॉक अगले कुछ दिनों या हफ्तों में अच्छी मूवमेंट करने वाला है, तो वे स्टॉक खरीद लेंगे और कीमत फिर से गिरने से पहले उसे बेच देंगे। वही दूसरी तरफ अगर उन्हें लगता है कि कोई स्टॉक अगले कुछ दिनों या हफ्तों में नीचे जाने वाला है, तो वे उस स्टॉक को “शॉर्ट” करेंगे। 

ज्यादातर समय, स्विंग ट्रेडर्स यह तय करने में लगाते हैं कि संभावित ट्रेड में जोखिम और अधिकतम लाभ को देखते हुए ट्रेड करना है या नहीं। 

उदाहरण के लिए, यदि एक स्विंग ट्रेडर का मानना ​​​​है कि अगले सप्ताह में किसी स्टॉक की कीमत बहुत तेजी से बढ़ सकती है, तो वह ट्रेडर उस जोखिम को लेने और कुछ शेयर खरीदने के लिए इच्छुक हो सकता हैं। क्योंकि वहां उसको कम जोखिम के साथ अच्छा प्रॉफिट करने का मौका मिल रहा है।  

लेकिन अगर उस स्टॉक कीमत नीचे गिर जाती है तो उस स्थिति में ट्रेडर को अपनी पोजीशन साइज के अनुसार नुकसान उठाना होगा। इसलिए कहा जाता है कि हमेशा अपनी पोजीशन साइज कम रखे जिससे कि ज्यादा नुकसान का सामना न करना पड़े। 

 

स्विंग ट्रेडिंग का उद्देश्य क्या है?

स्विंग ट्रेडिंग एक ट्रेडिंग शैली है जिसका मुख्य उद्देश्य एक छोटी अवधि के भीतर स्टॉक खरीदना या बेचना शामिल है, जिससे की वह स्टॉक में होने वाले मूवमेंट से प्रॉफिट कर सके। एक स्विंग ट्रेडर आमतौर पर कुछ मूवमेंट दिखाने वाले शेयरों को खोजने की कोशिश करता है और ट्रेंड की शुरुआत में ट्रेड में प्रवेश करता है। ज्यादातर मामलों में, एक स्विंग ट्रेडर ट्रेंड खत्म होने से पहले ट्रेड से बाहर निकलने का प्रयास करता है।

स्विंग ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को 2 दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक बनाए रखना चाहते हैं, जिससे स्विंग ट्रेडिंग ट्रेड का अच्छे से फायदा लिया जा सके, स्विंग ट्रेड दो प्रकार के होते हैं:

1) काउंटर ट्रेंड स्विंग ट्रेड – स्टॉक के ट्रेंड की दिशा में रेजिस्टेंस या सपोर्ट एरिया में बेचना या खरीदना (उदाहरण के लिए, अपट्रेंड के दौरान रेजिस्टेंस में बेचना या डाउनट्रेंड के सपोर्ट पर खरीदना)।

2) स्विंग ट्रेड के बाद की प्रवृत्ति – माइनर ट्रेंड की दिशा में सपोर्ट पर खरीदना या रेजिस्टेंस पर बेचना (उदाहरण के लिए, अपट्रेंड के दौरान सपोर्ट में खरीदना)।

अभी तक आप Swing Trading Meaning in Hindi को अच्छे से समझ गए होंगे अभी हम ये देखते है कि स्विंग ट्रेडिंग और डे ट्रेडिंग में क्या अंतर है?

 

स्विंग ट्रेडिंग और डे ट्रेडिंग में क्या अंतर है?

स्विंग ट्रेडिंग और डे ट्रेडिंग कुछ हद तक समान हैं। क्योंकि दोनों में लाभ कमाने के प्रयास में स्टॉक खरीदना और बेचना शामिल होता है, लेकिन इनके बीच सबसे बड़ा अंतर समय का होता है।

स्विंग ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह तक होल्ड रखते है, जबकि इंट्राडे ट्रेडर अपनी पोजीशन को सेम डे पर क्लोज है। 

डे ट्रेडर्स के पास स्विंग ट्रेडर की तरह “धैर्य” नहीं है, इसलिए वह प्राइस में होने वाले छोटे – छोटे बदलावों से पैसा बनाने की कोशिश करते है और अपनी पोजीशन को ओवरनाइट होल्ड करने का रिस्क नहीं लेते है। 

स्विंग ट्रेडिंग और डे ट्रेडिंग में एक भी मुख्य अन्तर है कि अगर आप इंट्राडे ट्रेडिंग करते है तो आपको ब्रोकर की तरफ से मार्जिन दिया जाता है जिस कारण से आप कम पैसो के साथ भी इंट्राडे ट्रेडिंग की शुरुआत कर सकते है। 

जबकि अगर आप स्विंग ट्रेडिंग करते है तो आपको ब्रोकर की तरफ से कोइ मार्जिन नहीं दिया जाता है जिस कारण से आपको ट्रेड करने के लिए ज्यादा पैसो  आवश्यकता होती है। 

इंट्राडे ट्रेडिंग में स्विंग ट्रेडिंग के मुकाबले ज्यादा जोखिम है क्योंकि आपको मार्जिन मिलता है जिस कारण से आप पोजीशन साइज बड़ा रख लेते है और मार्केट आपके खिलाफ जाने पर ज्यादा नुकसान करते है। 

 

निष्कर्ष 

स्विंग ट्रेडिंग सक्रिय ट्रेडिंग का सबसे लोकप्रिय रूप माना जाता है, क्योंकि इसमें कम जोखिम के साथ ज्यादा प्रॉफिट अर्जित करने की क्षमता है। यह भारतीय शेयर बाजार में ट्रेड करने का एक शानदार तरीका है। 

स्विंग ट्रेडिंग से एक ट्रेडर को काफी लाभ और रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, एक ट्रेडर के रूप में आपको इसमें शामिल जोखिम से अवगत होना महत्वपूर्ण है।

हमें उम्मीद है कि आपको Swing Trading Meaning in Hindi लेख अच्छे से समझ में आ गया होगा।