स्टॉक मार्केट में स्क्वायर ऑफ शब्द का इस्तेमाल बहुत किया जाता है, लेकिन अभी भी बहुत से ट्रेडर्स और निवेशक इसके मतलव को नही समझते है इसलिए आज हम Square off Meaning in Hindi लेख में समझेंगे कि स्क्वायर ऑफ किया है। 

तो चलिए Square off Meaning in Hindi लेख में हम स्क्वायर ऑफ को विस्तार से समझते है और इससे संबधित सभी प्रश्नो का जबाब आपको Square off Meaning in Hindi लेख में मिल जायेगा।

 

Square off Meaning in Trading in Hindi

अगर आपने कोई ट्रेड लिया है और कुछ समय बाद जब आप उस ट्रेड से बाहर निकलते है तो इस प्रक्रिया को स्क्वायर ऑफ कहा जाता है। जिसमे ट्रेडर लाभ कमाने के उद्देश्य से किसी स्टॉक में ट्रेड लेता है और प्रॉफिट होते ही अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ या बंद कर देता है। 

स्क्वायर ऑफ एक ट्रेडर के लिए सेटेलमेंट शैली है, जहां एक ट्रेडर अपने द्वारा खरीदे गए सभी शेयरों को बेच देता है। 

एक ट्रेडर के रूप में अगर इंट्राडे ट्रेडिंग करते है तो यह आपके लिए अनिवार्य  है कि जिस दिन आप ट्रेड लेंगे उसी दिन आपको अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करना होगा। अगर आप ऐसा नहीं करते है तो आपका ब्रोकर स्वचालित रूप से बिना आपकी परमिशन के आपकी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ कर देगा। 

स्क्वायर-ऑफ का मुख्य उद्देश्य होल्डिंग ट्रेडों को बंद करना होता है। इसका मतलब यह है कि अगर आपने सुबह किसी स्टॉक को खरीदा या बेचा है और आप इंट्राडे ट्रेडिंग कर रहे है तो आपको मार्केट बंद होने से पहले अपनी सभी पोजीशन स्क्वायर ऑफ करना होगा। 

हम इसे एक उदाहरण की मदद से समझते है – 

मानलीजिए एक ट्रेडर के रूप में आप 1000 रूपये प्रति शेयर की दर पर HDFC Bank के 100 शेयर अपने ब्रोकर की मदद से खरीद लेते है और आप यह उम्मीद करते है कि जैसे ही इसकी प्राइस 1010 से ऊपर जाएगी, अपनी पोजीशन को स्क्वायर कर देंगे।  

इस स्थिति में अगर 03:15 PM से पहले शेयर की 1010 तक नहीं पहुँचती है या फिर 1000 से भी नीचे आ जाती है तब भी आपको 03:15 PM से पहले अपनी पोजीशन को निकालना होगा, नहीं आपका ब्रोकर स्वयं ही आपकी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ कर देगा। 

 

अपनी पोजिशन को स्क्वायर ऑफ कैसे करें?

अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करना बहुत आसान है, मानलो आपने रिलायंस के कुछ शेयर्स खरीदे है और कुछ समय बाद प्रॉफिट होने पर आप उन्हें निकालना चाहते है।  तब आप आप अपने स्टॉक ब्रोकर के ऐप या वेबसाइट के माध्यम से अपनी पोजिशन पर जाकर उसे स्क्वायर-ऑफ कर सकते है।

इसको एक उदाहरण की मदद से समझते है :

मान लीजिए आपने निफ़्टी फ्यूचर के कॉन्ट्रैक्ट को खरीदा है और आप उम्मीद करते है कि निफ्टी ऊपर की और मूव करेगा। कुछ समय के बाद मार्केट आपकी दिशा में मूव करने लगता है और आपको अच्छा प्रॉफिट दिखने लगता है। अव आप चाहते है कि इस प्रॉफिट को लेकर पोजीशन से बाहर हो जाए। 

अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करने के लिए आप अपनी पोजीशन पर जाए और सैल पर क्लिक करे, क्योंकि पहले आपने खरीदा था , अगर आपने पहले बेचा होता तो स्क्वायर के समय आपको उस पोजीशन को खरीदना होता। 

सेल पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक विंडो ओपन होगी जिसमे आप कितने शेयर्स बेचना चाहते है और किस प्राइस पर बेचना चाहते है यह बिकल्प मिल जायेंगे। 

अभी तक हम Square off Meaning in Hindi को समझ गए है इसके बाद आइए समझते है कि भारतीय स्टॉक मार्केट की स्क्वायर-ऑफ समयसीमा क्या है?

 

ऑटो-स्क्वायर-ऑफ टाइमिंग क्या है?

अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश या ट्रेडिंग करते है तो आप जानते ही होंगे कि भारतीय स्टॉक मार्केट सुबह 09:15 खुलता है और दोपहर 03:30 पर बंद हो जाता है।  इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान इसी समय सीमा के अंदर सभी ट्रेडिंग निर्णय लेने होते है। 

जैसा कि आप जानते है कि आप अगर किसी स्टॉक को खरीदते है तो आपको उन्हें बेचना भी होता है अगर आप ऐसा नहीं करते है तो अधिकांश ब्रोकर द्वारा सभी स्टॉक और एफ एंड ओ पोजीशन को 03:15 – 03:20 PM के बीच ऑटो स्क्वायर-ऑफ कर दिया जाता है।

इसके अलावा अगर हम करेंसी फ्यूचर्स की बात करे तो इसका ऑटो-स्क्वायर-ऑफ टाइमिंग शाम 4:45 बजे से शाम 4:50 बजे के बीच होता है। इसके साथ ही एमसीएक्स का ऑटो-स्क्वायर-ऑफ टाइम मार्केट बंद होने से ठीक 30 मिनट पहले होता है यानि कि लगभग 10:35 बजे और रात 11:20 बजे के बीच होता है।

 

ऑटो स्क्वायर ऑफ चार्ज क्या है?

अगर आप अपनी पोजीशन को स्वयं मार्केट बंद होने से पहले स्क्वायर नहीं करते है तो आपका ब्रोकर आपकी पोजीशन को स्वयं ही स्क्वायर कर देगा और ऑटो स्क्वायर-ऑफ फीस भी चार्ज करेगा, जोकि अलग – अलग ब्रोकर की अलग – अलग हो सकती है। 

अधिकांश ब्रोकर ऑटो स्क्वायर-ऑफ कॉस्ट के रूप में ट्रेडर से प्रत्येक ऑटो स्क्वायर-ऑफ ऑर्डर पर 20 से 50 रुपये (प्लस 18 प्रतिशत GST) चार्ज करते है। इसलिए अगर आप नहीं चाहते है कि आपसे यह चार्ज लिया जाए तो हमेशा समय से पहले अपनी पोजीशन को स्क्वायर करे। 

 

निष्कर्ष

इंट्राडे ट्रेडिंग में बहुत जोखिम है इसलिए ट्रेडर्स को इसके सभी पहलु पर अच्छे से ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करते है तो ऑटो स्क्वायर-ऑफ पोजीशन की पैनल्टी आपके नुकसान को बढ़ा सकती है। 

इस लिए यह सुनिश्चित करले कि इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान अपनी पोजीशन को ऑटो स्क्वायर-ऑफ समय से पहले ही स्क्वायर ऑफ कर दे, जिससे कि आप ब्रोकर द्वारा लगाए जाने बाली पेनल्टी से बच सके। 

हमें उम्मीद है कि Square off Meaning in Hindi लेख में स्क्वायर ऑफ से संबधित आपके सभी सबालो के जबाव मिल होंगे, अगर आपको इस पोस्ट से कुछ सीखने को मिला हो तो इसे शेयर कर दूसरो तक जरूर पहुँचाए।