भारतीय स्टॉक मार्केट में ट्रेडर्स के दिमाग में सिर्फ एक ही लक्ष्य होता है: प्रॉफिट। इसलिए कुछ ट्रेडर्स बहुत कम समय में ज्यादा ट्रेड कर प्रॉफिट करने के कोशिश करते है जिसे स्कैल्पिंग ट्रेडिंग के नाम से जाना जाता है।  इसलिए आज हम Scalping Trading Meaning in Hindi लेख में समझने की कोशिश करेंगे की स्केल्पिंग ट्रेडिंग क्या है और स्केल्पिंग ट्रेडिंग कैसे काम करती है। 

प्रत्येक ट्रेडर या निवेशक की अपनी एक ट्रेडिंग शैली होती है। इनमें से कुछ निवेश करना पसंद करते हैं, जबकि अन्य इंट्राडे ट्रेडिंग करना पसंद करते है। 

जब हम इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में सोचते हैं, तो विचार विल्कुल सरल होता है, कि स्टॉक मार्केट खुलने पर ट्रेड लेना हैं और मार्केट बंद होने से पहले अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ़ करना देना हैं। जिसमे यदि मार्केट आपके फेवर में जाती है तो आप लाभ कमाते हैं; अन्यथा, आपको नुकसान उठाना होता है। 

इंट्राडे ट्रेडिंग का ही दूसरा हिस्सा है स्कैल्पिंग, जिसमें ट्रेडर बहुत ही छोटी अवधि के लिए ट्रेड लेता है।  

अभी हम Scalping Trading Meaning in Hindi लेख में स्कैल्पिंग ट्रेडिंग के प्रत्येक पहलु को समझे, अभी हम स्कैल्पिंग ट्रेडिंग क्या है? इससे से शुरुआत करते है। 

 

स्कैल्पिंग ट्रेडिंग क्या है? 

Scalping Trading Meaning :- स्कैल्पिंग ट्रेडिंग में एक ट्रेडर अपनी पोजीशन को कुछ सेकेण्ड से लेकर कुछ मिनटों तक होल्ड रखता है। 

स्केलिंग सबसे सबसे छोटे टाइम फ्रेम की ट्रेडिंग शैली है जहां ट्रेडर एक ट्रेड में बड़ा लाभ के वारे में सोचने की बजाय बहुत सी ट्रेड कर छोटे – छोटे लाभ लेने की कोशिश करता है। स्केलिंग ट्रेडिंग में ट्रेडर किसी स्टॉक का छोटे टाइम फ्रेम में एनालिसिस करता है और ट्रेडिंग अवसर मिलने पर ट्रेड लेता है और मुनाफ़ा मिलते ही कुछ सेकेण्ड से लेकर कुछ मिनटों के अंदर उस ट्रेड से बाहर हो जाता है।  

उदाहरण के लिए, यदि आप स्कैल्पिंग ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो आप एक ही दिन में 10 – 20 ऑर्डर कर सकते हैं और बढ़ती कीमत से लाभ के लिए कुछ मिनटों के बाद उन्हें बेच सकते हैं। 

इस तरह से, एक स्कैल्पर ज्यादा ट्रेड लेने पर भरोसा करता हैं, भले ही प्रत्येक ट्रेड में उसे कम लाभ हो। स्केलिंग के लिए ट्रेडर्स को अत्यधिक अनुशासन और सख्त एग्जिट स्ट्रेटेजी की आवश्यकता होती है। क्योंकि स्टॉक की प्राइस में लगातार उतार-चढ़ाव होता है, जिस कारण एक स्कैल्पर को मुनाफ़ा मिलने पर तुरंत निकलना होता है।  

यदि स्कैल्पर ऐसा नहीं करता है, तो स्कैल्पिंग ट्रेडिंग में किए गए छोटे – छोटे मुनाफे सभी एक साथ नुकसान में बदल सकते है। 

अभी हम Scalping Trading Meaning in Hindi में समझ गए है कि स्कैल्पिंग ट्रेडिंग क्या है? अभी हम यह देखते है कि स्कैल्पिंग ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

ये भी पढ़े : Best Intraday Trading Tips in Hindi | इंट्राडे ट्रेडिंग के नियम

 

स्कैल्पिंग ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

स्कैल्पिंग ट्रेडिंग स्टॉक मार्केट में इस धारणा पर काम करती है कि सही समय पर सही ट्रेड में एंट्री ली जा सके, जिससे बहुत से ट्रेड करते के उपरान्त छोटे – छोटे प्रॉफिट को मिलाकर एक बड़ा प्रॉफिट बन सके। 

स्कैल्पिंग करने वाले ट्रेडर्स को स्कैल्पर्स के रूप में जाना जाता है, और इनका मानना ​​है कि एक ही ट्रेड में अधिक जोखिम लेने से बेहतर है कि एक ही दिन में कम जोखिम के साथ कई ट्रेड ली जाए, भले ही मुनाफा कम हो। 

 

स्कैल्पर ट्रेडर के लक्षण

अनुशासित: एक स्केलर को बहुत ही अनुशासित होना पड़ता है। अगर एक स्कैल्पर ट्रेडर स्टॉक मार्केट में सफल होना चाहता है, तो उसे अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी, ट्रेडिंग प्लान और मनी मैनेजमेंट का सख्ती से पालन करना चाहिए। अधिकांश स्कैल्पर हानियों के लिए एक दैनिक सीमा निर्धारित करते हैं और यदि वह संख्या उल्लंघन में है तो व्यापार करना बंद कर दें। नुकसान की दैनिक सीमा स्केलपर्स को अपने नुकसान का पीछा करने से रोकती है।

डिसीजन मेकर: स्कैल्पिंग ट्रेडिंग करते समय, प्रतिक्रिया देने के लिए अक्सर बहुत कम समय होता है। इसलिए स्कैल्पर्स को सेकंड में ट्रेड निर्णय लेने पड़ते हैं और सिर्फ कुछ सेकेण्ड की देरी से उसी अवसर को गंवाना भी पड़ता है। एक स्कैल्पर ट्रेडर को कोई गलत ट्रेडिंग निर्णय लेने पर त्वरित निर्णय लेने की भी आवश्यकता होती है।

ट्रेडिंग की गहरी समझ: एक स्कैल्पर को प्राइस एक्शन ट्रेडिंग और टेक्निकल एनालिसिस की गहरी समझ होनी चाहिए, जिससे वह ट्रेडिंग के दौरान उचित निर्णय ले सके। 

ये भी पढ़े : What is Technical Analysis in Hindi | तकनीकी विश्लेषण क्या है?

 

स्कैल्पिंग और डे – ट्रेडिंग के बीच अंतर

हालांकि स्कैल्पिंग ट्रेडिंग, डे – ट्रेडिंग का एक हिस्सा है, फिर भी यह मौलिक रूप से शैली और उद्देश्य में भिन्न है। यहां आपको स्कैल्पिंग और डे-ट्रेडिंग के बीच के अंतर को समझाया गया हैं:

स्कैल्पिंगडे-ट्रेडिंग
टाइमफ्रेम एक स्कैल्पर ऐसे टाइमफ्रेम का उपयोग करता है जो सेकंड या मिनटों के साथ मार्केट के उतार-चढ़ाव की जानकारी देता हो। एक इंट्राडे ट्रेडर मिनट से लेकर घंटे तक के टाइम फ्रेम का उपयोग करता है।
ट्रेड मात्रा स्केलिंग ट्रेडिंग में उच्च ट्रेड मात्रा शामिल है जो एक दिन में 100 ट्रेडों तक जा सकती है।डे-ट्रेडिंग में ट्रेडर एक दिन में 1-3 ट्रेड लेते हैं।
उद्देश्यस्कैल्पिंग ट्रेडिंग का उद्देश्य जितना संभव हो उतने ट्रेडों को एक्सेक्यूट करना और प्रत्येक से छोटे - छोटे मुनाफे को वुक करना है।डे-ट्रेडिंग का उद्देश्य ट्रेड अच्छा लाभ कमाना है चाहे उसके लिए लंबा इंतजार ही करना क्यों न पड़े।
स्पीड स्कैल्पर्स की ट्रेडिंग एक्सेक्यूशन बहुत तेज होते है। वे कुछ ही सेकंड में स्टॉक खरीदते और बेचते हैं।इंट्राडे ट्रेडर औसत गति से ट्रेड करते हैं। वे स्टॉक बेचने या खरीदने के लिए घंटों तक इंतजार करते हैं।
विश्लेषणस्कैल्पर किसी स्टॉक को प्रेडिक्ट करने के लिए सिर्फ टेक्निकल एनालिसिस करना पसंद करते हैं।इंट्राडे ट्रेडर स्टॉक को प्रेडिक्ट करने के लिए टेक्निकल और फंडामेंटल एनालिसिस दोनों करना पसंद करते हैं

अभी तक हम Scalping Trading Meaning in Hindi में स्कैल्पिंग ट्रेडिंग के बिभिन्न पहलुओं को समझ गए है? अभी हम यह देखते है कि स्कैल्पिंग ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान क्या है? 

 

स्कैल्पिंग ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान 

स्कैल्पिंग ट्रेडिंग के फायदे

कम जोखिम – स्कैल्पिंग ट्रेडिंग यह सुनिश्चित करता है कि कम होल्डिंग अवधि के कारण आप मार्केट में कम जोखिम के साथ ट्रेड करे और प्रॉफिट मिलते ही मार्केट से बाहर हो जाएं। 

अधिक प्रॉफिट की संभावना – स्कैल्पिंग ट्रेडिंग करते समय अधिक प्रॉफिट की संभावना होती है क्योंकि यह स्टॉक मार्केट में बड़े प्राइस मूवमेंट पर निर्भर नहीं करता है।

अधिक जीत दर – स्कैल्पिंग ट्रेडिंग में आपकी जीत का प्रतिशत अन्य स्ट्रेटेजी की तुलना में थोड़ा अधिक होने की संभावना होती है क्योंकि स्कैल्पिंग ट्रेडिंग में ट्रेडर सिर्फ छोटे मुनाफे के लिए ट्रेड करता है।

एक से अधिक ट्रेडों की अनुमति देता है – स्केलिंग ट्रेडिंग आपको किसी भी ट्रेडिंग सत्र के दौरान जितना संभव हो सके उतने आकर्षक ट्रेड अवसरों से लाभ उठाने की अनुमति देता है।

फंडामेंटल एनालिसिस की आवश्यकता नहीं है – स्केलिंग ट्रेडिंग करते समय, आपको किसी भी स्टॉक का फ़ुंदांणेताल एनालिसिस करने के जरुरत नहीं है। क्योंकि आपकी ट्रेड केवल छोटी अवधि के लिए होती है इसलिए आपको सिर्फ टेक्निकल एनालिसिस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।  

कोई रोलओवर या स्वैप शुल्क नहीं – स्कैल्पिंग ट्रेडिंग में स्प्रेड के अलावा कोई अन्य अतिरिक्त शुल्क नहीं है क्योंकि कोई भी ट्रेड ओवर नाईट नहीं होता है।

 

स्कैल्पिंग ट्रेडिंग के नुकसान 

गहरी समझ की आवश्यकता है – स्कैल्पिंग ट्रेडिंग एक स्वाभाविक रूप से कठिन ट्रेडिंग शैली है जिसमें एक ही चीज़ को बार-बार दोहराने के लिए बहुत अधिक एकाग्रता के साथ-साथ धैर्य की आवश्यकता होती है।

उच्च ब्रोकरेज फीस – स्कैल्पिंग में एक ही दिन के अंदर बहुत सारे ट्रेड करना शामिल है, जिसकी बजह से ब्रोकरेज फीस ज्यादा देनी होती है क्योंकि ब्रोकर आपसे प्रति ऑर्डर के अनुसार ब्रोकरेज लेता है। 

टाइम टेकिंग – स्कैल्पिंग में समय की आवश्यकता होती है और ट्रेडर को लगातार कई स्क्रीन के सामने घंटो तक बैठने की आवश्यकता होती है।

 

सामान्यत : पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.1: आपको स्कैल्पिंग ट्रेडिंग क्यों करनी चाहिए?

उत्तर: स्कैल्पिंग ट्रेडिंग जोखिम को कम करने और छोटे – छोटे मुनाफे को मिलाकर एक बड़े मुनाफे का एहसास करने का एक शानदार तरीका है। स्टॉक मार्किट में सकारात्मक और नकारात्मक स्टॉक प्राइस उतार-चढ़ाव लगातार होते रहते हैं, इसलिए आपके पास लाभ कमाने का एक अच्छा अवसर हमेशा रहता है।

 

Q.2: क्या स्कैल्पिंग ट्रेडिंग से पैसा कमा सकते हैं?

उत्तर: हां, कई ट्रेडर्स स्कैल्पिंग ट्रेडिंग से काफी मुनाफा कमाते हैं। हालाँकि, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके पास ट्रेडिंग की अच्छी समझ होनी चाहिए। 

 

निष्कर्ष 

स्केल्पिंग ट्रेडिंग आपसे एक ट्रेडर के रूप में टेक्निकल एनालिसिस, सही माइंडसेट, स्ट्रेटेजी और सही मनी मैनेजमेंट की उम्मीद करती है। इसलिए अगर आप एक स्कैल्पर बनना चाहते है तो आपको तेजी के साथ अपने ट्रेडिंग निर्णय लेने की समझ होनी चाहिए। 

हमें उम्मीद है कि Scalping Trading Meaning in Hindi लेख  माध्यम से आप स्केल्पिंग ट्रेडिंग के प्रत्येक पहलु को अच्छे से समझ गए होंगे।  

हैप्पी ट्रेडिंग…