एक ट्रेडर के रूप में आपने मार्जिन का नाम सूना होगा, क्योंकि यह ट्रेडिंग का एक जरूरी पहलु होता है। इसलिए Margin Trading Meaning in Hindi लेख में हम मार्जिन ट्रेडिंग के वारे में विस्तार से समझेंगे। 

मार्जिन ट्रेडिंग पोजीशन साइज को बढ़ाने के लिए पूंजी उधार लेने की प्रक्रिया है। स्टॉक मार्केट में ट्रेडर अपनी पोजीशन साइज़ को बढ़ाने के लिए मार्जिन का उपयोग करते हैं और अपने खाते में मौजूद कुल रूपये की तुलना में अधिक पैसो के साथ ट्रेड करते हैं। मार्जिन ट्रेडर्स को सही होने पर अच्छा प्रॉफिट देता है और गलत होने पर अधिक नुकसान भी देता है।

अभी हम Margin Trading Meaning in Hindi के प्रत्येक पहलु को अच्छे से समझते है, जैसे मार्जिन ट्रेडिंग क्या है और मार्जिन ट्रेडिंग कैसे काम करती है। 

 

मार्जिन ट्रेडिंग क्या है?

मार्जिन ट्रेडिंग में एक ट्रेडर अपने ब्रोकर से ट्रेड करने के लिए पैसे उधार लेता है, जिसके बदले में वह आपसे कुछ इंटरेस्ट चार्ज करता है। ब्रोकर द्वारा दिए गए अतिरिक्त मार्जिन देने की प्रक्रिया को ही मार्जिन ट्रेडिंग कहा जाता है। 

मार्जिन ट्रेडिंग करने के लिए पहले से आपके खाते में कुछ रूपये होने चाहिए, तभी ब्रोकर आपको अतिरिक्त मारजी दे सकता है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि आप अपने ट्रेडिंग खाते में न्यूनतम राशि बनाए रखे। 

अगर आप मार्जिन ट्रेडिंग कर रहे है, और आपकी ली हुई पोजीशन आपकी दिशा में जाती है तो आपको बहुत अच्छा प्रॉफिट होगा, वही दूसरी तरफ अगर पोजीशन आपके खिलाफ जाती है तो आपको भारी नुकसान भी हो सकता है। 

 

मार्जिन ट्रेडिंग का महत्व

निवेशक और ट्रेडर अपनी पोजीशन पर संभावित रिटर्न बढ़ाने के लिए मार्जिन ट्रेडिंग का उपयोग करते है। यदि निवेशक की एनालिसिस सही रहती हैं तो आपको अच्छा रिटर्न मिलता है और अपनी पूंजी पर अच्छा मुनाफा कमाते हैं और यह मुनाफ़ा उधार के पैसे पर कमाया जाता हैं। 

दूसरी ओर, यदि ट्रेडर की एनालिसिस गलत जाती हैं तो आपके निवेशित मूल्य में गिरावट आती है, तो वे अपनी पूंजी और उधार के पैसे पर अपना लाभ खो देते हैं। 

मार्जिन ट्रेडिंग का उपयोग आप निवेश के साथ – साथ इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए भी कर सकते है। एक इंट्राडे ट्रेडर सेम डे में अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करता है फिर चाहे उसे प्रॉफिट हो या फिर नुकसान हो। 

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निवेशकों और ट्रेडर्स को अपने डीमैट खातों में मार्जिन का उपयोग करके स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड करने की अनुमति दी है। मार्जिन ट्रेडिंग की निवेशकों को अपने निवेश से अधिक कमाई करने में मदद करता है जब बाजार अत्यधिक अस्थिर हो।

ट्रेडिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले दो तरह के मार्जिन होते हैं इंट्राडे ट्रेडिंग मार्जिन और ओवरनाइट मार्जिन। डे-ट्रेडिंग मार्जिन ट्रेडर को 50% नकद डाउन पेमेंट के साथ मार्जिन पर शेयरो को ट्रेड करने की अनुमति देता है, जो उनके ब्रोकरेज खाते से आता है। 

ओवरनाइट मार्जिन निवेशकों को 50% से कम डाउन पेमेंट के साथ शेयरों को खरीदने की अनुमति देता है, जिससे कि वह अपनी पोजीशन को जब तक चाहे होल्ड रख सकते है। 

अभी तक आप Margin Trading Meaning in Hindi लेख में समझ होंगे कि मार्जिन ट्रेडिंग क्या है, अभी हम यह देखते है कि मार्जिन ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

 

मार्जिन ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

मार्जिन वह राशि है जो ब्रोकर आपको उधार देता हैं। मार्जिन प्रतिशत आपके पोर्टफोलियो के वर्तमान मार्केट प्राइस  पर आधारित होता है और यह एक गारंटी के रूप में कार्य करता है कि आप अपने ट्रेडों पर अच्छा रिटर्न की उम्मीद कर रहे है। 

उदाहरण के लिए, यदि आपके डीमेट खाते में ₹1 लाख रूपये के शेयर्स हैं, और आपका ब्रोकर 50% मार्जिन की अनुमति देता है, तो वह आपको शेयरों को खरीदने के लिए ₹50,000 उधार देगा। हालांकि, आपका ब्रोकर उधार में शामिल जोखिम के आकलन के आधार पर मार्जिन को कम या ज्यादा कर सकता है। 

इस प्रकार आपके डीमेट खाते में पहले से 1 लाख रूपये है और आपका ब्रोकर अतिरिक्त मार्जिन के रूप ₹50,000 उधार देता है तो आप 1.5 लाख के शेयर्स में ट्रेड या निवेश कर सकते है। 

जब आप मार्जिन पर शेयरों को खरीदते हैं, तो आप अपने ब्रोकर से शेयरों के कुल मूल्य का भुगतान करने के लिए पैसे उधार लेते हैं और समय के साथ वह ऋण चुकाने के लिए सहमत होते हैं। आपके द्वारा उधार ली गई राशि यानि मार्जिन इस बात पर निर्भर करता है कि आपके डीमेट खाते में कितना मार्जिन उपलब्ध है, क्योंकि अतिरिक्त मार्जिन लेने के लिए आपके डीमेट खाते में कुछ राशि पहले से होनी अनिवार्य है जो कि डाउन पेमेंट की तरह काम करती है। 

अभी तक आप Margin Trading Meaning in Hindi लेख में मार्जिन ट्रेडिंग क्या है और मार्जिन ट्रेडिंग कैसे काम करती है समझ गए होंगे, अभी हम समझते है कि मार्जिन और लीवरेज ट्रेडिंग में क्या अंतर है?

 

मार्जिन और लीवरेज ट्रेडिंग में क्या अंतर है?

मार्जिन और लीवरेज दोनों ही ब्रोकर की तरफ से दिए जाते है, लिबरेज में आपको कोई भी इंटरेस्ट देना नहीं होता है, जबकि आप मार्जिन ट्रेडिंग करते है तो आपको उस पर इंटरेस्ट देना होता है क्योंकि ब्रोकर आपको ट्रेड करने के लिए लोन देता है। 

इन परिस्थितियों में, ब्रोकर से उधार लिया गया पैसा एक लोन की तरह काम करता है, जिससे ट्रेडर को महत्वपूर्ण ट्रेड करने की अनुमति मिलती है।

दोनों अवधारणाएं लगभग समान लगती हैं, हालांकि, यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि मार्जिन सभी को समान रूप से दिया जाता है, जबकि मार्जिन पर खुद की मर्जी से लोन के रूप में लेते है जो आपको इंटरेस्ट के साथ चुकाना होता है। 

 

निष्कर्ष

भारत में मार्जिन ट्रेडिंग तब लोकप्रिय हुआ, जब स्टॉक मार्केट में विदेशी निवेशकों का आगमन हुआ। हालांकि मार्जिन शब्द अपने आप में नया नहीं है, इस प्रणाली की मदद से, ट्रेडर अतिरिक्त मार्जिन लेकर बेहतर रिटर्न कमाते है। 

लेकिन यह हमेशा याद रखे कि मार्जिन ट्रेडिंग आपके लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है, अगर आप बिना मार्केट को समझे या बिना अनुभव के मार्जिन ट्रेडिंग करते है तो आपको बहुत ज्यादा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। 

इसलिए यह सलाह दी जाती है कि शरुआती समय में मार्जिन ट्रेडिंग न करे, एक बार जब आपको को मार्केट की अच्छी समझ और अनुभव हो जाए तब आप अपने प्रॉफिट के लिए मार्जिन ट्रेडिंग का उपयोग कर सकते है। 

हमें उम्मीद है कि Margin Trading Meaning in Hindi लेख में आप मारजी ट्रेडिंग क्या है और कैसे काम करती है अच्छे से समझ गए होंगे। अगर फिर भी आपका कोई सबाल रहता है तो आप हमें नीचे कमेंट कर सकते है।