अगर आप शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करते हैं तो आपने कभी न कभी फ्यूचर ट्रेडिंग का नाम सुना ही होगा, तो आज हम Future Trading in Hindi पोस्ट में जानेंगे कि फ्यूचर ट्रेडिंग क्या है, फ्यूचर ट्रेडिंग कैसे की जाती है और इसमें कौन – कौन से जोखिम शामिल है।

फ्यूचर ट्रेडिंग डेरीवेटिव का ही एक भाग है, जैसा कि आपको पता होगा कि डेरिवेटिव फाइनेंसियल कॉन्ट्रैक्ट होते है जो स्टॉक, कमोडिटीज, करेंसी आदि जैसे एसेट से अपना मूल्य प्राप्त करते हैं। डेरीवेटिव को विस्तार से समझने के लिए आपको यह लेख पढ़ना चाहिए। 

चलिए अभी हम Future Trading in Hindi लेख में फ्यूचर ट्रेडिंग क्या है? इसके वारे में समझते है….

 

फ्यूचर ट्रेडिंग क्या है?

फ्यूचर ट्रेडिंग को समझने से पहले, हम समझते हैं कि फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स क्या होते हैं?

फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट:- फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीददार और विक्रेता के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसमें खरीददार और विक्रेता दोनों भविष्य में एक पूर्वनिर्धारित क्वांटिटी में किसी एसेट को एक निश्चित प्राइस पर खरीदने और बेचने का कॉन्ट्रैक्ट करते हैं। इस कॉन्ट्रैक्ट को फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट कहा जाता है।

फ्यूचर ट्रेडिंग :- फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया को फ्यूचर ट्रेडिंग कहा जाता है।

स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से बहुत से स्टॉक्स और इंडेक्स में फ्यूचर ट्रेडिंग की जा सकती है इसके साथ – साथ आप करेंसी और कमोडिटी में भी फ्यूचर ट्रेडिंग के माध्यम से ट्रेडिंग कर सकते है। 

 

फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट कितने तरह के होते है?

फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स में तीन महीने के कॉन्ट्रैक्ट होते हैं:

  1. Current Month Contract
  2. Near Month Contract
  3. Far Month Contract

Current Month Contract :- Current Month Contract का मतलब है जो महीना चल रहा है उस महीने के कॉन्ट्रैक्ट को खरीदना या बेचना। 

उदाहरण के लिए,

माना अभी जनवरी का महिना चल रहा है और आप जनबरी महीने के ही कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करते है तो उन कॉन्ट्रैक्ट को Current Month Contract कहा जाता है। 

 

Near Month Contract :- Near Month Contract का मतलब है जो महीना चल रहा है उससे अगले महीने के कॉन्ट्रैक्ट को खरीदना या बेचना। 

उदाहरण के लिए,

माना अभी जनवरी का महिना चल रहा है और आप फरबरी महीने के कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करते है तो उन कॉन्ट्रैक्ट को Near Month Contract कहा जाता है। 

 

Far Month Contract :- Far  Month Contract का मतलब है जो महीना चल रहा है उससे अगले दो महीने के कॉन्ट्रैक्ट को खरीदना या बेचना। 

उदाहरण के लिए,

माना अभी जनवरी का महिना चल रहा है और आप मार्च महीने के कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करते है तो उन कॉन्ट्रैक्ट को Far  Month Contract कहा जाता है। 

नोट :- जिस महीने के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को आप खरीद या बेच रहे है, वह कॉन्ट्रैक्ट उस महीने के आखिरी गुरुवार को एक्सपायर हो जाता है। 

 

फ्यूचर ट्रेडिंग कैसे करते हैं?

अभी Future Trading in Hindi लेख में हम एक उदाहरण की मदद से समझते है कि फ्यूचर ट्रेडिंग कैसे की जाती है?

माना अगर हम एचडीएफसी बैंक के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को खरीदना या बेचना चाहते हैं, तो हम इसके तीन फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स को खरीद या बेच सकते हैं।

हम फ्यूचर्स को केवल लॉट में खरीद या बेच सकते हैं और प्रत्येक स्टॉक और इंडेक्स के लिए लॉट साइज अलग-अलग होता है। यह लॉट साइज स्टॉक एक्सचेंज द्वारा तय किए जाते है कि किस स्टॉक और इंडेक्स का लॉट साइज क्या होगा। एक्सचेंज किसी भी स्टॉक और इंडेक्स के लॉट साइज को कभी भी बदल सकता है।

उदाहरण,

एचडीएफसी बैंक अप्रैल फ्यूचर

वर्तमान प्राइस – 1500 रु

लॉट साइज – 500 शेयर्स

अव अगर एचडीएफसी बैंक के शेयर प्राइस में अप्रैल के अंत तक 10 रुपये का उछाल आता है तो आपको 500×10 यानी 5 हजार रूपये का प्रॉफिट होगा। 

इसके दूसरी तरफ अगर एचडीएफसी बैंक के शेयर प्राइस में अप्रैल के अंत तक 10 रुपये की गिरावट आती है तो आपको 500×10 यानी 5 हजार रूपये का नुकसान होगा। 

फ्यूचर में ट्रेड क्यों करे? 

यदि आप फ्यूचर में ट्रेड करते हैं, तो आप बहुत कम पैसे में बहुत अधिक शेयरों में ट्रेड कर सकते हैं। जहाँ हमें एक दिन से अधिक समय के लिए शेयर खरीदने पर शेयरों की पूरी राशि देनी होती है, उसी फ्यूचर्स में हम केवल शेयरों के मूल्य का 15 – 50% देकर ट्रेड कर सकते हैं, इस राशि को प्रारंभिक मार्जिन भी कहा जाता है।

लॉन्ग टाइम के लिए शॉर्ट पोजीशन :- स्टॉक्स में आप एक दिन से ज्यादा शॉर्ट पोजीशन नहीं ले सकते हैं, लेकिन फ्यूचर ट्रेडिंग में आप कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने तक अपनी शॉर्ट पोजीशन होल्ड रख सकते हैं।

कम ब्रोकरेज और टैक्स :- अगर हम फ्यूचर्स में ट्रेडिंग करते हैं तो कुल मिलाकर हमें शेयर ट्रेडिंग की तुलना में बहुत कम चार्जेज देने पड़ते है।

 

फ्यूचर्स ट्रेडिंग की विशेषताएं

* फ्यूचर्स ट्रेडिंग की कई विशेषताएं हैं, जिसके कारण फ्यूचर्स ट्रेडिंग बहुत लोकप्रिय है। आइए फ्यूचर ट्रेडिंग की कुछ विशेषताओं को समझते हैं जो इस प्रकार हैं:

* फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की प्राइस उसकी संपत्ति (स्टॉक या इंडेक्स) पर निर्भर करती है। यदि संपत्ति की कीमत बढ़ती है, तो फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की कीमत भी बढ़ेगी।

* फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को आसानी से ट्रेड किया जा सकता है।

* यदि कोई ट्रेडर अपने कॉन्ट्रैक्ट से निकलना चाहता है तो वह कभी भी बाहर जा सकता है जिसके लिए उसे कोई जुर्माना नहीं देना होगा।

* फ्यूचर ट्रेडिंग दो पक्षों के बीच होती है जिसमें दोनों पक्षों द्वारा अपने कॉन्ट्रैक्ट को पूरा नहीं करने का डर हमेशा बना रहता है, इसलिए इसे सेबी द्वारा नियंत्रित किया जाता है, ताकि ट्रेडिंग में कोई घोटाला न हो।

* फ्यूचर ट्रेडिंग को सेबी द्वारा सुचारू रूप से चलाया जाता है, जिसमें चूक की संभावना न के बराबर होती है।

* फ्यूचर्स ट्रेडिंग के अपने नियम होते हैं जिनका एक ट्रेडर को पालन करना होता है।

* फ्यूचर ट्रेडिंग में सेटलमेंट का समय निश्चित होता है, जिसमें दोनों पक्ष अपने कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार समय पर अपने कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करते हैं और इसके लिए किसी भौतिक दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती है।

 

फ्यूचर ट्रेडिंग में शामिल जोखिम

फ्यूचर ट्रेडिंग में शेयर ट्रेडिंग की तुलना में अधिक जोखिम होता है और इस कारण से एक ट्रेडर को फ्यूचर ट्रेडिंग करते समय अपने जोखिम का प्रबंधन करना चाहिए। फ्यूचर ट्रेडिंग में हम वास्तविक राशि से कम राशि देकर ट्रेडिंग करते हैं, इसलिए फ्यूचर ट्रेडिंग में रिस्क और रिवॉर्ड दोनों ज्यादा होते हैं।

 

निष्कर्ष

फ्यूचर ट्रेडिंग, इक्विटी ट्रेडिंग की तुलना में ज्यादा जोखिम भरी है और इक्विटी ट्रेडिंग से अलग ज्ञान की मांग करती है इसलिए फ्यूचर ट्रेडिंग में आने से पहले फ्यूचर ट्रेडिंग को अच्छे से समझले उसके उपरान्त ही फ्यूचर ट्रेडिंग की शुरुआत करे। 

अगर आप बिना मार्केट और फ्यूचर ट्रेडिंग की समझ के इसमें आते है तो आप बहुत बड़ा जोखिम ले रहे है। 

हेलो दोस्तों, अगर Future Trading in Hindi से संबंधित कोई संदेह है, तो आप इस पोस्ट के नीचे कमेंट कर सकते हैं। हम आपके प्रश्न का उत्तर जल्द से जल्द देंगे।